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सूर्य नमस्कार के फायदे एवं करने की विधि (Benefits of Surya Namaskar in Hindi)

हमें बहुत खुशी हो रही है कि आपको सूर्य नमस्कार में रुचि है। मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि यदि आप नया जीवन चाहते हैं तो सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar in Hindi) जरूर करें।

आज के वैज्ञानिक सूर्य के कई रहस्य के उजागर कर चुके हैं और इस पर अभी भी शोध जारी है। लेकिन हमारे ऋषि-मुनियों ने सूर्य के अपार शक्ति, इसके दिव्यता एवं रहस्य को प्राचीन काल में ही समझ चुके थे। जिसे जनकल्याण के लिए उसके कई लाभ (Benefits of Surya Namaskar in Hindi) एवं उपयोग को लोगों तक पहुंचाया।

लेकिन आज के लोग सूर्य के प्रति अल्प ज्ञान के कारण इसके फायदे से अनजान हैं। हम इसे एक शब्द में कहें तो सूर्य जीवनदायिनी है। इसके प्रति हमें पूरी श्रद्धा एवं जागरूक रहना चाहिए।

सूर्य नमस्कार 7 आसनों के द्वारा 12 स्टेप में किया जाता है जिसे नीचे विस्तार से बताया गया है।

इस लेख में सूर्य नमस्कार करने के विधि, इसके मंत्र, मंत्र का अर्थ, इसके फायदे आदि को विस्तार से बताया गया है।

नए योग साधक के लिए नीचे कुछ अलग उपाय बताए गए हैं। जिसके द्वारा आसानी से सूर्य नमस्कार को सीख सकते है इसलिए इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।

नमस्कार क्या है? What is Surya Namaskar in Hindi –

सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar in Hindi) का अर्थ है सूर्य देव को प्रणाम या नमस्कार करना। यह 7 आसनों का समन्वय है जिसे 12 स्टेप में किया जाता है। इसे करते समय 12 मंत्रों के द्वारा मन में सूर्य देव (भगवान) के प्रति आराधना या कृतज्ञ व्यक्त किया जाता है।

यह आसनों का समूह है जिसे करने से संपूर्ण शरीर का व्यायाम होता है। और इसके असीमित लाभ होने के कारण सभी रोगों को नष्ट करता है।

सूर्य नमस्कार के 7 आसन 12 स्टेप – Surya Namaskar 12 Steps Names in Hindi –

  1. प्रणाम आसन – Pranamasana
  2. हस्तउत्तान आसन – Hasta uttanasana
  3. पादहस्त आसन – Padahastasana
  4. अश्व संचालन आसन – Ashwa Sanchalan Aasan
  5. पर्वत आसन – Parvatasana
  6. अष्टांग नमस्कार आसन – Ashtang Namskarasana
  7. भुजंग आसन – Bhujangasana
  8. पर्वत आसन – Parvatasana
  9. अश्व संचालन आसन – Ashwa Sanchalan Aasan
  10. पादहस्त आसन – Padahastasana
  11. हस्तउत्तान आसन – Hasta uttanasana
  12. प्रणाम आसन – Pranamasana

ऊपर बताए गए सातों आसनों को नीचे के लेख में विस्तार से बताया गया जो नए योग साधक जरूर पढ़ें।

Benefits of Surya Namaskar in Hindi

सूर्य नमस्कार करने की विधि – Steps of Surya Namaskar in Hindi –

स्टेप 1. – प्रणाम आसन / नमस्कार आसन – Pranamasana

सबसे पहले किसी नरम चटाई पर दोनों पैरों को मिलाकर सावधान में खड़ा हो जाए।
सांस लेते हुए दोनों हाथों को पंख की तरह फैलाते हुए कंधे के समानांतर उठाएं।
दोनों हथेलियों को आसमान की तरह पलटे और दोनों हाथों को ऊपर उठाते हुए हथेलियों को आपस में मिला ले जैसे वृक्षासन में मिलाते हैं।
अब इसी स्थिति में दोनों हथेलियों को अपने छाती (वक्ष स्थल) के सामने लाएं जैसे नमस्कार प्रणाम या प्रार्थना करते हैं।
यहाँ स्टेप 1 पूरा हुआ।

स्टेप 2. – हस्तउत्तान आसन – hasta uttanasana

हथेलियों को खोलते हुए दोनों हाथ नीचे ले जाएं।
श्वास लेते हुए दोनों हाथों को सामने से ऊपर उठाएं कानों के सीध में।
धड़ एवं सिर को अपनी क्षमता अनुसार पीछे झुकाए।
ध्यान रहे – दोनों हाथ कंधों की चौड़ाई के बराबर खुला होगा कान के सीध में।

स्टेप 3. – पादहस्त आसन – Padahastasana

श्वास छोड़ते हुए आगे की तरफ झुके।
दोनों हथेलियों को पैरों के बगल में जमीन से स्पर्श करें।
पेट को संकुचित करते हुए सिर को घुटने से स्पर्श कराएं।
ध्यान रहे – घुटना सीधा हो। पैर मुड़ना नहीं चाहिए।

स्टेप 4. – अश्व संचालन आसन – Ashwa Sanchalan Aasan

पहले की स्थिति से ही बाएं पैर को पीछे ले जाएं एवं पैर के पंजे की ऊपरी सतह तथा घुटना को जमीन से आसपास कराएं।
ध्यान रहे – दोनों हाथों एवं दाएं पैर की स्थिति में बदलाव ना हो।
बाएं पैर पीछे ले जाते समय श्वास ले एवं दाहिने घुटने मोड़े।
सिर को ऊपर उठाएं एवं नजर आकाश की ओर रखें।
इस स्थिति में शरीर का कुल भार दोनों हथेलियों, दाहिने पैर घुटना एवं बाएं पैर के पंजों की ऊपरी सतह पर होगा।
ध्यान रहे – दोनों हाथ सीधा।

स्टेप 5. – पर्वत आसन – Parvatasana

श्वास छोड़ते हुए दाएं पैर को सीधा कर के बाएं पैर के पंजे के पास दाएं पंजे को रखें।
शरीर का भार दोनों हाथों एवं दोनों पैर पर रखें।
अब कमर (नितम्ब) को जितना हो सके ऊपर उठाएं एवं सिर को दोनों भुजाओं के बीच में लाएं।
नजरें घुटनों या नाभी की तरह रखें।
ध्यान रहे – घुटना सीधा हो एवं एड़िया जमीन से टिका हुआ हो।

स्टेप 6. – अष्टांग नमस्कार आसन – Ashtang Namskarasana

घुटनों को मोड़ते हुए शरीर को आगे लाएं एवं नीचे झुका ढें। जमीन पर इस प्रकार लेटे कि दोनों पैर के पंजे, दोनों घुटने, दोनों हथेलियां, छाती, ठुड्डी जमीन से स्पर्श कर रहा हो।
ध्यान रहे – कमर एवं पेट जमीन से स्पर्श न करें।
इस स्टेप को करते समय श्वास को रोककर रखें।

स्टेप 7. – भुजंग आसन – Bhujangasana

हाथों को सीधा करें एवं शरीर को आगे खींचे।
श्वास लेते हुए छती एवं सिर को ऊपर उठाए।
कमर के ऊपरी हिस्से एवं सिर को पीछे की तरफ झुकाएं।
नजरें आसमान की तरफ रखें।

स्टेप 8. – पर्वत आसन – Parvatasana (यह स्टेप 5 का ही पुनरावृति है।)

श्वास को छोड़ते हुए कमर को ऊपर उठाएं एवं शरीर को पीछे लाएं तथा पैर के तलवा जमीन पर स्थापित करें।
जितना हो सके कमर / नितम्ब को ऊपर उठाएं एवं दोनों हाथों को सीधा करें।
ध्यान रहे दोनों पैर मिला हुआ हो एवं नजरे घुटने या नाभी की तरफ हो।

स्टेप 9. – अश्व संचालन आसन – Ashwa Sanchalan Aasan (यह स्टेप 4 का ही पुनरावृति है।)

श्वास लेते हुए बाएं पैर को दोनों हथेलियों के बीच में स्थापित करें एवं घुटने को मोड़ते हुए पैर पर सवार हो जाएं।
दाएं पैर के पंजे के ऊपरी सतह एवं घुटने को जमीन से स्पर्श कराएं एवं पीछे तान कर रखें।
इस स्थिति में शरीर का भार दोनों हथेलियां, बाएं पैर, दाएं पैर के पंजे के ऊपरी सतह एवं दाएं घुटने पर होगा।
ध्यान रहे दोनों हाथ सीधा हो एवं नजरें आसमान की तरह हो।

स्टेप 10. – पादहस्त आसन – Padahastasana (यह स्टेप 3 का ही पुनरावृति है।)

दोनों हाथों पर दवाव देते हुए दाएं पैर को बाएं पैर से मिलाएं (दोनों हाथों के बीच में)।
श्वास को छोड़ते हुए कमर / नितम्ब को ऊपर उठाएं एवं सिर को घुटने से स्पर्श कराएं।
ध्यान रहे घुटने सीधा हो एवं दोनों पैर दोनों हथेलियां एक सीध में हो।

स्टेप 11. – हस्तउत्तान आसन – Hastautanasana (यह स्टेप 2 का ही पुनरावृति है।)

श्वास को लेते हुए दोनों हाथ को सामने से ऊपर उठाएं एवं शरीर को सीधा करें।
हाथों को कान के सीध में रखें एवं दोनों हाथों को कंधे की चौड़ाई के बराबर खोलकर रखें।
धड़ एवं सिर को अपनी क्षमता अनुसार पीछे झुकाएं।
नजरें आसमान की तरफ रखें।

स्टेप 12. – प्रणाम आसन – Pranamasana (यह स्टेप 1 का ही पुनरावृति है।)

श्वास छोड़कर समान स्वसन क्रिया करें एवं शरीर को सीधा करें।
दोनों हथेलियों को आपस में मिला लें (जिस प्रकार वृक्ष आसन में मिलाते हैं)।
इस स्थिति से ही हाथों को सामने से वक्ष स्थल के पास लाएं (प्रणाम / प्रार्थना / नमस्कार की तरह )।

इस प्रकार सूर्य नमस्कार का आधा चक्र (आवृति) पूरा हुआ। पूरा आवृति करने के लिए इसी 12 स्टेप को दोबारा पैर बदलकर करें। सभी स्टेप उसी प्रकार होगा केवल स्टेट 4 और स्टेप 9 में पैर को बदली करना है।

स्टेप 4 में बाएं पैर को पीछे ले गए थे इस बार दाएं पैर को पीछे ले जाएंगे।
स्टेप 9 में बाएं पैर को आगे लाए थे इस बार दाएं पैर को आगे लाएंगे।

इस प्रकार से कुल 24 स्टेप का समूह बनता है जिसमें सभी स्टेप दो – दो बार करने से पूरे एक चक्र (आवृति) बनता है। यह सभी बारहो स्टेप के अलग-अलग 12 मंत्र है जिसे सूर्य नमस्कार करते समय हर स्टेप के साथ-साथ उच्चारण कर सकते हैं।

सूर्य नमस्कार के 12 मंत्र अर्थ सहित – Surya Namaskar Mantra Meaning in Hindi –

क्रम सं.आसन का नामआसन मंत्रमंत्र का अर्थध्यान चक्र
1.प्रणाम आसनॐ मित्राय नमःहे विश्व के मित्र सूर्य, आपको नमस्कार।अनाहत चक्र
2.हस्तउत्तान आसनॐ रवये नमःहे संसार के चहल-पहल करनेवाले वाले सूर्य देव , आपको नमस्कार।विसुद्धि चक्र
3.पादहस्त आसनॐ सूर्याय नमःहे संसार को जीवन देने वाला सूर्य देव, आपको नमस्कार।स्वाधिष्ठान चक्र
4.अश्व संचालन आसनॐ भानवे नमःहे प्रकाशपुंज, आपको नमस्कार।आज्ञा चक्र
5.पर्वत आसनॐ खगाय नमःहे आकाश में गति करने वाले देव, आपको नमस्कार।विसुद्धि चक्र
6.अष्टांग नमस्कार आसनॐ पूष्णे नमःहे संसार के पोषक , आपको नमस्कार।मणिपूरक चक्र
7.भुजंग आसनॐ हिरण्यगर्भाय नमःहे ज्योतिर्मय , आपको नमस्कार।स्वाधिष्ठान चक्र
8.पर्वत आसनॐ मरीचये नमःहे किरणों के स्वामी , आपको नमस्कार।विसुद्धि चक्र
9.अश्व संचालन आसनॐ आदित्याय नमःहे संसार के रक्षक, आपको नमस्कार।आज्ञा चक्र
10.पादहस्त आसनॐ सवित्रे नमःहे विश्व को उत्पन्न करने वाले, आपको नमस्कार।स्वाधिष्ठान चक्र
11.हस्तउत्तान आसनॐ अर्काय नमःहे पवित्रता को देने वाले , आपको नमस्कार।विसुद्धि चक्र
12.प्रणाम आसनॐ भास्कराय नमःहे प्रकाश करने वाले , आपको नमस्कार।अनाहत चक्र

सूर्य नमस्कार के फायदे – Benefits of Surya Namaskar in Hindi –

त्वचा विकार –

सूर्य नमस्कार को करने से शरीर के सभी अंगों में समान रूप से रक्त प्रवाह होता है एवं सभी कोशिकाओं में समान ऊर्जा मिलता है। जिससे त्वचा संबंधित सभी रोग ना हो जाता है। त्वचा में निखार आता है, चेहरे की झुर्रियां समाप्त हो जाता है एवं शरीर सुंदर दिखने लगता है।

दुर्बलता –

सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar in Hindi) करने से शरीर के सभी अंगों को व्यायाम मिलता है। जिससे शरीर संपूर्ण स्वस्थ एवं बलवान बनता है। यहां तक कि जोड़ों व मांसपेशियों के व्यायाम होने के कारण इन्हें भी संपूर्ण लाभ एवं मजबूती मिलता है।

मोटापा –

सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar in Hindi) को मोटापा का दुश्मन माना जाता है। मोटापा से परेशान व्यक्ति इस आसन को जरूर करें। इसे करने से तेजी से वजन कम करने में बहुत मदद मिलता है। सूर्य नमस्कार के नियमित अभ्यास से शरीर सुडौल एवं छरहरा बनता है। मोटापे जैसी बीमारी तो आसपास भी नहीं भटकते हैं।

मासिक धर्म –

सूर्य नमस्कार करना स्त्रियों के लिए बहुत ही लाभदायक है इससे कई स्त्री रोग दूर हो जाते हैं। जिन महिलाओं को मासिक धर्म में अनियमितता होती है उसे इस आसन को करने से सुधार हो जाता है।

रक्त परिसंचरण –

जिन व्यक्ति को रक्त संचार से संबंधित परेशानी है उसे इस आसन को करने से शरीर में रक्त परिसंचरण तंत्र के साथ-साथ हृदय को भी स्वस्थ बनाता है। और पूरे शरीर में समान मात्रा में रक्त को प्रवाहित करता है।
हालांकि अधिक उच्च रक्तचाप वाले व्यक्ति इस आसन को किसी योग शिक्षक के देखरेख में ही करें अन्यथा इसे करने से बचें।

नेत्र विकार –

सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar in Hindi) से आंखें संबंधित समस्या दूर होता है। इसे करने से तेज आती है तथा दृष्टि विकार दूर होता है।

मस्तिष्क विकार –

सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar in Hindi) से तनाव, अवसाद, चिंता, परेशानी दूर होता है। माइग्रेन में भी सूर्य नमस्कार का अधिक लाभ है। इस आसन को विद्यार्थी एवं कम उम्र के लोग अवश्य करें इसके निरंतर अभ्यास से बुद्धि, यादाश्त क्षमता एवं सोचने समझने की क्षमता में वृद्धि होती है।

उदर विकार –

जिन व्यक्ति को पाचन संबंधित परेशानी है उससे सूर्य नमस्कार को करने से उसकी परेशानी दूर होती है। कब्ज गैस, एसिडिटी आदि रोगों के लिए सूर्य नमस्कार रामबाण साबित होता है।

संपूर्ण लाभ –

  1. सूर्य नमस्कार से ऊर्जा उधर्वमुखी होता है।
  2. यह आसन प्राणशक्ति प्रदाता कहलाता है।
  3. मानसिक शांति मिलती है।
  4. सेक्स समस्या दूर होता है।
  5. वीर्य में वृद्धि होता है।
  6. शरीर बलवान एवं स्फूर्ति बनता है।
  7. मोटापा दूर होता है।
  8. शरीर छरहरा बनता है।
  9. सूर्य नमस्कार से पूरे शरीर का व्यायाम होता है।
  10. स्मरण शक्ति बढ़ता है।
  11. स्त्रियों को सूर्य नमस्कार करने से शरीर सुडौल सुंदर छरहरा एवं आकर्षक बनता है।
  12. शारीरिक और मानसिक ऊर्जा में संतुलन आता है।
  13. व्यक्ति सूर्य के समान तेजवान बनता है।
  14. सूर्य नमस्कार कुंडलिनी जागरण में सहायक है।

सूर्य नमस्कार करते समय सावधानियां – Precautions of surya namaskar in hindi –

  • अधिक उच्च रक्तचाप के मरीज इस आसन को न करें।
  • ह्रदय विकार वाले इस आसन को न करें।
  • हृदय विकार वाले व्यक्ति इस आसन को न करें।
  • हर्निया से ग्रसित व्यक्ति को इस आसन को नहीं करना चाहिए। मेरुदंड में गंभीर समस्या है तो इस आसन को न करें।
  • छोटे बच्चों को इस आसन को करने की जरूरत नहीं है।
  • बुखार या किसी अन्य बीमारी से पीड़ित हैं तो इस आसन को स्वस्थ होने के बाद ही करें।
  • शरीर में ज्यादा कमजोरी हो तो इस आसन को धीरे धीरे करें या एक चक्र से ज्यादा न करें।
  • चक्कर आने या सिर घूमने की समस्या हो तो इस आसन को न करें।

सूर्य नमस्कार करने से पहले इन बातों को ध्यान रखें –

  1. सूर्य नमस्कार ब्रह्म मुहूर्त (सुबह) में ही करना ज्यादा उचित है।
  2. सूर्य नमस्कार पूरब दिशा की ओर मुंह करके ही करना चाहिए।
  3. यदि आपके पास सुबह में समय के अभाव है तो साम में खाली पेट रहने पर ही करें।
  4. सूर्य नमस्कार सुबह का नित्य क्रिया, स्नान आदि करने के बाद ही करना चाहिए।
  5. कपड़े आरामदायक एवं ढीला ढाला पहनना चाहिए।
  6. कमर को कस कर नहीं बांधना चाहिए।
  7. इस आसन को करने के लिए साफ सुथरा एवं हवादार स्थान का चुनाव करें।
  8. सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar in Hindi) करने से पहले शरीर को वार्मअप (गर्म) करने के लिए छोटी-छोटी व्यायाम जरूर करें।
  9. किसी भी योगासन करने के तुरंत बाद नाश्ता या जलपान न करें।

सूर्य नमस्कार करने के बाद आसन –

सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar in Hindi) करने के बाद शव आसन जरुर करें। आप चाहे तो योग निद्रा भी कर सकते हैं।
इन्हें करने से शरीर को पूरा अराम मिलता है और थकान दूर हो जाता है।
फिर से किसी आसन या कार्य करने के लिए शरीर को ऊर्जा प्राप्त हो जाता है। इसलिए इन आसनों को जरूर करें ।

और पढ़ें – योग के मुख्य 21 आसन। जरूर करे ये योगासन

सूर्य नमस्कार करने के आसान तरीका –

सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar in Hindi) को ऊपर बताये गए सात आसनो को बारह स्टेप में किया जाता है। जिसे नए योग साधक के करने में परेशानी होती है।
कौन सी आसन कैसे करें इसकी जानकारी की कमी को दूर करने के लिए पहले इन सातों आसनो को अलग-अलग करके अभ्यास करें फिर एक साथ करें।
नीचे इन सातों आसनों को अलग अलग करने की विधि एवं लाभ को बताया गया है जिसे पढ़कर आप आसानी से सीख सकते हैं।

नमस्कार आसन करने की विधि –

  • सर्वप्रथम दोनों पैरों को मिलाकर सावधान खड़ा हो जाए।
  • अब दोनों हाथों को बगल से (पंख की तरह) कंधों के समांतर उठाएं।
  • फिर दोनों हथेलियों को आसमान की तरह पलटी करें।
  • और हाथों को ऊपर ले जाकर दोनों हथेलियों को आपस में मिला लें (वृक्षासन की तरह)।
  • हथेलियों के मिले हुए स्थिति में दोनों हाथ को स्थल के सामने लाएं और प्रणाम या प्रार्थना करने की मुद्रा बनाए।

नमस्कार आसन के लाभ – रक्त संचार समान होता है। एकाग्रता बढ़ता है। मन को शांति मिलता है। किसी भी कार्य को करने से मैं ध्यान को केंद्रित करने में सहायक है।

हस्त उत्तानासन करने की विधि-

  • दोनों पैर मिलाकर सावधान में खड़े हो जाएं।
  • श्वास लेते हुए दोनों हाथों को सामने से ऊपर उठाएं कानों के सीध में।
  • अब सिर एवं धड़ को पीछे झुकाए।
  • नजरें आसमान की तरह रखें।
  • स्वास लेते हुए मूल अवस्था में आएं।
  • ध्यान रहे दोनों हाथों की दूरी आपके कंधों के समान हो।

हस्त उत्तानासन के लाभ – हाथों एवं कंधो को व्यायाम मिलता है। पाचन तंत्र स्वस्थ होता है। पेट की चर्बी कम होती है। कब्ज में भी लाभदायक है। कमर दर्द में आराम मिलता है।

पादहस्तासन करने की विधि –

  • सबसे पहले दोनों पैरों को मिलाकर सावधान स्थिति में खड़ा हो जाए।
  • अब दोनों हाथों को सामने से ऊपर उठाते हुए कान के सिध में लाए हैं।
  • श्वास छोड़ते हुए आगे झुके एवं दोनों हथेलियों को जमीन से स्पर्श कराएं।
  • अब पेट संकुचित करते हुए सीर को घुटने से स्पर्श कराएं।
  • ध्यान रहे घुटना मुड़ना नहीं चाहिए।
  • स्वास लेते हुए मूल स्थिति में वापस आए।

पादहस्तासन के लाभ – कब्ज दूर करता है। पेट की चर्बी कम होता है। रक्त संचार तेज होता है। मेरुदंड लचीला बनता है। पेट संबंधित विकार दूर होता है। अमाशय को भी लाभ मिलता है।

अश्व संचालन आसन करने की विधि –

  • सबसे पहले पादहस्तासन में खड़ा हो जाएं।
  • अब सांस लेते हुए बाएं पैर को पीछे ले जाएं एवं दाहिने घुटने को मोड़ते हुए सिर एवं धाद को ऊपर उठाएं।
  • बाएं पैर के तलवे को आसमान की तरह करते हुए बाएं घुटने एवं पंजे के ऊपरी सतह को जमीन से स्पर्श कराएं।
  • गर्दन को पीछे झुकाए एवं नजरें आसमान की तरफ करें।
  • इस स्थिति में शरीर का भार दोनों हथेलियों, दाएं पैर, बाऐं घुटना एवं बाएं पंजे के ऊपरी सतह पर होना चाहिए।
  • इसी क्रिया को अब दूसरे पैर को बदली कर करें।

अश्व संचालन आसन के लाभ – पाचन तंत्र ठीक होता है। रक्त संचार को बढ़ाता है। मेरुदंड लचीला बनता है। पेट संबंधित विकार दूर होते हैं।

पर्वतासन करने की विधि –

  • सबसे पहले घुटने के बल खड़ा हो जाए।
  • अब घुटने के 2 से 3 फीट आगे दोनों हथेलियों को जमीन से टिका दें।
  • अंगुलियां सामने की ओर रखें।
  • दोनों हाथों की बीच की दूरी अपने कंधों के बराबर रखें।
  • हाथों एवं पैरों पर दबाव बनाते हुए कमर / नितम्ब को जितना हो सके ऊपर उठाएं।
  • नजरें घुटना या नाभी की तरफ रखें।
  • इस स्थिति में सिर को जमीन से स्पर्श कराने की कोशिश करें।
  • अपने सुविधानुसार घुटने जमीन में टिकाते हुए मूल अवस्था में वापस आए।

पर्वत आसन के लाभ – आगे झुकने के कारण रक्त संचार सिर में बढ़ता है। चेहरा चमकदार बनता है। आंखों की रोशनी बढ़ती है। बालों का झड़ना रूक जाता है। मेरुदंड मजबूत बनता है। शरीर लचीला बनता है। हाथों एवं कंधों में मजबूती आती है।

अष्टांग नमस्कार आसन करने की विधि –

  • किसी नरम चटाई पर पेट के बल लेट जाएं।
  • अब अपने शरीर को इस प्रकार स्थापित करें कि दोनों पैर की अंगुली, दोनों घुटने, दोनों हथेलियां, छाती एवं ठुड्डी जमीन से स्पर्श करें।
  • ध्यान रहे कमर और पेट जमीन से स्पर्श न करे।
  • साधारण स्वसन क्रिया करें।

अष्टांग नमस्कार करने के लाभ – शरीर को पूरा आराम मिलता है। नई चेतना का संचार होता है। मेरुदंड संबंधित विकार दूर होता है। मन शांत होता है।

भुजंग आसन करने की विधि –

  • किसी नरम चटाई पर पेट के बल लेट जाएं।
  • अब अपने हथेलियों को कंधे की बगल में जमीन से टिका दें।
  • सांस लेते हुए सिर एवं धड़ को ऊपर उठाएं एवं दोनों हथेलियों पर भर दें।
  • गर्दन को पीछे झुकाए एवं नजरें आसमान की तरफ रखें।
  • पैरों को पीछे तान कर रखें।
  • ध्यान रहे पैरों की तलवा आसमान की तरफ हो।
  • सांस छोड़ते हुए मूल अवस्था में वापस आए।

भुजंग आसन करने के लाभ – कब्ज दूर करता है। चर्बी कम करता है। मेरुदंड लचीला बनता है। कमर दर्द एवं स्लिप डिस्क में बहुत लाभदायक है। फेफड़ों को स्वस्थ बनाता है। पाचन तंत्र को मजबूत करता है। रक्त संचार को बढ़ाता है।

FAQ’s

सूर्य नमस्कार किस उम्र के व्यक्ति को नहीं करना चाहिए ?

सूर्य नमस्कार 8 वर्ष से कम उम्र के बच्चे को करने की जरूरत नहीं है। बच्चे को इस आसन को करने से बचना चाहिए।

हमें सूर्य नमस्कार क्यों करना चाहिए ?

सूर्य नमस्कार ऐसे योग आसनों का समूह है जिसे करने से संपूर्ण शरीर का व्यायाम होता है। तथा इसके असीमित लाभ होने के कारण कई रोगों का नाश करने में सहायक है। इसलिए सभी व्यक्ति को सूर्य नमस्कार जरूर करना चाहिए। चाहे इसके बाद वह कोई और आसन करें या ना करें या कोई व्यायाम ना करें।

सूर्य नमस्कार किसे नहीं करना चाहिए?

3 माह से अधिक गर्भवती महिला, उच्च रक्तचाप के मरीज, हर्निया के मरीज, स्लिप डिस्क वाले व्यक्ति एवं बच्चे को सूर्य नमस्कार नहीं करना चाहिए।

सूर्य नमस्कार और चंद्र नमस्कार में क्या फर्क है ?
Answer

सूर्य नमस्कार और चंद्र नमस्कार में बहुत अंतर है जैसे- सूर्य नमस्कार में सूर्य को नमस्कार किया जाता है तथा चंद्र नमस्कार में चंद्रमा को नमस्कार किया जाता है।
सूर्य नमस्कार में 12 स्टेप होते हैं लेकिन चंद्र नमस्कार में 12 स्टेप या कहीं कहीं 14 स्टेप भी बताया गया है।
सूर्य नमस्कार 7 आसनों के द्वारा किया जाता है लेकिन चंद्र नमस्कार में कुछ आसनों का प्रयोग होता है तथा कुछ अलग पोस्चर के द्वारा किया जाता है जिसे किसी आसन का नाम नहीं दिया गया है।
सूर्य नमस्कार और चंद्र नमस्कार का मंत्र अलग-अलग है।

इस लेख से आपने क्या सीखा –

इस लेख में आपने सूर्य नमस्कार करने की विधि (Surya Namaskar in Hindi), सूर्य नमस्कार के फायदे (Benefits of Surya Namaskar in Hindi), सूर्य नमस्कार के मंत्र एवं इसके अर्थ, सूर्य नमस्कार करते समय ध्यान रखने वाली मुख्य बातें एवं सावधानियां इत्यादि।

आपको यह लेख सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar in Hindi) से जुड़ी जानकारी कैसा लगा नीचे कॉमेंट बॉक्स में जरूर लिखे।आपके द्वारा किया गया कॉमेंट हमे अच्छी लेख लिखने के लिए प्रेरित करता है, और साथ मे ये भी जरुर बताए यदि लेख में कोई त्रुटि हो या सुधार की जरूरत हो तो अवश्य उसके बारे में लिखे जिससे हम सुधार कर त्रुटिहीन बना सेक।

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धन्यवाद…..

लेख स्रोत – संपूर्ण योग विद्या (किताब) एवं विकिपीडिया

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