Yogasan in Hindi

Best 21 Yogasan in Hindi : जरूर करे ये योगासन

यह सच है कि योगासन (Yogasan in Hindi) के द्वारा कई बीमारियों को दूर किया जाता है, साथ ही इसके नियमित अभ्यास से कई प्रकार की परेशानियों पर विजय पाया जा सकता है।

योग के नियमित अभ्यास से शारीरिक एवं मानसिक दोनों प्रकार की बीमारियों से छुटकारा मिलता है। यहां तक की शारीरिक दुर्बलता के साथ-साथ मानसिक दुर्बलता भी दूर हो जाता है।

योग रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, एवं तनाव को दूर करता है।

इस लेख में योग के प्रमुख 21 आसनों को विस्तार से बताया गया है जिसे किसी भी व्यक्ति रोजमर्रा की जिंदगी में अपना स्वस्थ एवं खुशहाल जीवन जी सकता है।

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क्या है योगासन ? What is Yogasan in Hindi ?

योग क्रिया की वह शारीरिक आकृति जिस पूर्ण अवस्था में शरीर को थोड़ी देर के लिए रोकते हैं उसे योगासन (Yogasan in Hindi) कहा जाता है। अर्थात योगासन प्रयास और विश्राम का संतुलन है। जिसे अभ्यास कर्ता (कोई व्यक्ति) आसन में आने के लिए प्रयास करता है और फिर वही पूर्ण अवस्था में विश्राम करता है।

21 प्रमुख योगासन – Best 21 Yogasan in Hindi –

  1. ताड़ासन
  2. वृक्षासन
  3. पादहस्तासन
  4. वीरभद्रासन
  5. कागासन
  6. बकासन
  7. गोमुखासन
  8. मत्स्यासन
  9. तुलासन या उथीत पद्मासन
  10. अष्टांग नमस्कारासन
  11. त्रिकोणासन
  12. पवन मुक्तासन
  13. भुजंगासन
  14. धनुरासन
  15. सेतुबंधासन या कंधरासन
  16. सर्वांगासन
  17. हलासन
  18. सिरसासन
  19. जानू शीर्षासन या जानू सिरासन
  20. अर्ध मत्स्येंद्रासन
  21. शवासन

ऊपर दिए गए सभी योगासन के करने की विधि , लाभ एवं सावधानियों को वित्तर से नीचे बताया गया है जिसे जरूर पढ़ें।

और पढ़ें – योग के फायदे जानकर हैरान हो जायेगें

Yogasan image with name in hindi

ताड़ासन – Tadasana / Yaad Yogasan in Hindi –

यह खड़ा होकर किए जाने वाला योगासन (Yogasan in Hindi) है। इसे करना बहुत ही सरल है इसे बच्चों को जरूर करना चाहिए।

ताड़ासन करने की विधि – Tadasana Karne Ka Tarika in Hindi –

  • दोनों पैरों को समानांतर सटाकर खड़ा हो जाए।
  • बगल से दोनों हाथ ऊपर उठाए एवं एक दूसरे के अंगुलियों को लॉक करें।
  • अब सांस लेते हुए शरीर को ऊपर खींचे एवं पैर के पंजों पर सवार हो जाए।
  • जांग एवं घुटनों की मांसपेशियों को ऊपर की तरफ खींचे।
  • पेट को अपने सुविधानुसार अंदर करें।
  • ध्यान रहे कमर गर्दन एवं रीड सीधा हो।
  • इस अवस्था में 15 से 20 सेकंड तक रुकें।
  • सांस छोड़ते हुए वापस मूल अवस्था में आ जाएं।

ताड़ासन करने के लाभ – Tadasana Benefits in Hindi –

  1. यह आसन लंबाई बढ़ाने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।
  2. शरीर में बैलेंस बढ़ता है।
  3. कमर दर्द एवं स्लिप डिस्क में लाभदायक है।
  4. शरीर की मांसपेशियों को मजबूती मिलता है।

वृक्षासन – Virikshasana / Vriksh Yogasan in Hindi –

यह खड़ा होकर किए जाने वाला योगासन (Yogasan in Hindi) है इस आसन को करते समय शरीर की आकृति वृक्ष पेड़ की समान बनता है इसलिए इसे वृक्षासन कहा जाता है।

वृक्षासन करने की विधि – Virikshasana Karne Ki Vidhi in Hindi –

  • सबसे पहले सावधान की स्थिति में खड़ा हो जाए अब बाएं हाथ की मदद से बाएं पैर को घुटने से मोड़कर हुए पंजे को दाहिने पैर के जंघा मूल में स्थापित करें।
  • ध्यान रहे एडी गुप्तांग से स्पर्श करता हो एवं अंगुलियां नीचे की तरफ हो।
  • अब सांस लेते हुए दोनों हाथों को बगल से उठाएं एवं ऊपर प्रणाम मुद्रा की तरह हथेलियों को आपस में मिला ले।
  • ध्यान रहे कोहनी सीधी हो एवं दोनों बाजू कान के सीध में हो।
  • यह पूर्ण स्थिति में 10 से 20 सेकंड तक रुके।
  • सांस छोड़ते हुए मूल अवस्था में वापस आए।
  • इस प्रक्रिया को पर बदल कर दूसरे पैर से करें।

वृक्षासन के लाभ – Virikshasana Benefits in Hindi –

  1. शरीर में स्थिरता बढ़ता है।
  2. हाथ पैर कांपने की समस्या दूर होता है।
  3. स्मरण शक्ति बढ़ती है।
  4. आंखों की रोशनी बढ़ती है पूर्णविराम हाथ पैर मजबूत होता है। शरीर में बैलेंस पावर बढ़ता है।

पादहस्तासन – Padhastasana / Paad hast Yogasan in Hindi –

यह खड़ा होकर की जाने वाला योगासन (Yogasan in Hindi) है । पाद का अर्थ पैर और हस्त का अर्थ हाथ होता है। इस आसन को करते समय हाथ के पंजे पर पैर रखकर खड़ा होना होता है।

पादहस्तासन करने की विधि – Padhastasana Kar3ne Ki Vidhi in Hindi –

  • अपने कद के अनुसार पैरों को खोल कर खड़ा हो जाए।
  • दोनों हाथों को सामने से ऊपर उठाएं एवं कान के सिद्ध में रखें।
  • सांस छोड़ते हुए कमर से आगे झुके पूर्णविराम दोनों हाथों की हथेलियों को आपस में दोनों पैरों के नीचे दबा दें।
  • इस क्रिया में घुटना नहीं मोड़ना चाहिए।
  • अब अपने सिर को दोनों घुटने के बीच में स्पर्श कराएं।
  • इस अवस्था में 10 से 15 सेकंड तक रुके।
  • सांस लेते हुए वापस मूल अवस्था में आ जाएं।

पादहस्तासन के लाभ – Padhastasana Benefits in Hindi –

  1. पेट की गैस बाहर होता है।
  2. पेट फूलने की समस्या दूर होता है।
  3. पेट की चर्बी कम होता है।
  4. बाल झड़ना रूक जाता है।
  5. आंखों की रोशनी बढ़ती है।
  6. चेहरे पर चमक आता है।
  7. सिर पर चढ़ा हुआ वायु उतर जाता है।

सावधानियां –

  • उच्च रक्तचाप के मरीज इस आसन को ना करें। कमर दर्द से परेशान हैं तो इस आसन को ना करें।
  • हृदय रोगी इस आसन को ना करें।
  • यदि आपको चक्कर आने की समस्या है तो इस आसन को करने से बचें।

वीरभद्रासन – Virbhadrasana / Virabhadra Yogasan in Hindi –

यह खड़ा होकर की जाने वाला योगासन (Yogasan in Hindi) है। यह आसन एक योद्धा की आकृति की तरह की जाती है।
यह आसन का नाम शिव के अवतार वीरभद्र के नाम पर रखा गया है।

वीरभद्रासन करने की विधि – Virbhadrasana Karne Ki Vidhi in Hindi –

  • दोनों पैरों को तीन से चार फीट खोल कर खड़ा हो जाए।
  • अपने शरीर को बाय की तरह घुमा ले एवं पैर के पंजों को भी उसी दिशा में स्थापित करें। दोनों हाथों को कंधे की ऊंचाई तक जमीन के समानांतर उठाएं।
  • चेहरा बाएं पैर और बाएं हाथ के सीध में रखें एवं सामने देखे।
  • बाएं पैर के घुटनों को मोड़ते हुए शरीर को थोड़ा नीचे लाएं।
  • ध्यान रहे बाएं पैर का घुटना ढकने से आगे ना जाए।
  • इस स्थिति में 10 से 20 सेकंड तक रुके एवं साधारण स्वसन क्रिया करें।
  • सांस लेते हुए धीरे-धीरे ऊपर उठे।
  • एवं साथ छोड़ते हुए दोनों हाथों को नीचे करें एवं मूल अवस्था में आ जाएं।
  • अब इसी प्रक्रिया को दाहिने तरफ से करें।

वीरभद्रासन के लाभ – Virbhadrasana Benefits in Hindi –

  1. जिस प्रकार इसका नाम है उसी प्रकार इसका लाभ भी है।
  2. हाथ पैर एवं कंधों की मजबूती बढ़ाता है। शारीरिक संतुलन को बनाए रखता है।
  3. सहनशीलता को वृद्धि करता है।
  4. शरीर के जकड़न से मुक्ति मिलता है।
  5. दूसरे या तीसरे महीने की गर्भवती महिला के लिए लाभदायक है।

सावधानियां –

  • गठिया या घुटनों की तेज दर्द वाले व्यक्ति इस आसन को ना करें।
  • उच्च रक्तचाप वाले व्यक्ति इस आसन को ना करें। शरीर में कमजोरी है तो इस आसन को ज्यादा देर तक ना करें।
  • उल्टी दस्त के समय इस आसन को ना करें।

वकासन – Vakasana / wak Yogasan in Hindi –

यह मध्यम वर्गीय योगासन (Yogasan in Hindi) है इसे बैठकर किया जाता है। इस आसन को करते समय शरीर की आकृति बगुला की तरह बनता है इसलिए इसे वर्क आसन कहा जाता है।

वकासन करने की विधि – Vakasana Karne Ki Vidhi in Hindi –

  • जमीन पर दोनों पर पर सवार होकर कुकड़ू बैठ जाएं।
  • दोनों हथेलियों को जमीन पर टीका दे ध्यान रहे अंगुलियां आगे की ओर हो। अपने घुटनों को काट के नीचे स्थापित करें।
  • अब हाथों पर दबाव देते हुए पैर को ऊपर उठाएं।
  • एड़ियां नितंब की ओर हो एवं पंजा बाहर की तरफ खींच कर रखें।
  • सिर और एड़ी लगभग एक समान रेखा में होना चाहिए।
  • इस स्थिति में साधारण स्वसन क्रिया करें एवं 10 से 20 सेकंड तक रुके।
  • पैर को जमीन में टिक आते हुए मूल अवस्था में वापस आ जाएं।

वकासन करने के लाभ – Vakasana Benefits in Hindi –

  1. पाचन तंत्र में सुधार होता है।
  2. पेट की बीमारी में लाभदायक है।
  3. पेट की गैस बाहर निकलता है।
  4. एकाग्रता को बढ़ाने में सहायक है। हाथ मजबूत होता है।
  5. शरीर के 72000 नाड़ीयों पर इसका असर पड़ता है।
  6. चेहरा चमकदार बनता है।
  7. कील मुंहासे एवं दूरियों में लाभदायक है।

सावधानियां –

  • उच्च रक्तचाप वाले व्यक्ति इस आसनपुर ना करें।
  • मस्तिष्क विकार से परेशान व्यक्ति इस आसन को ना करें।
  • हत्या कलाइयां में फ्रैक्चर है तो इस आसन को सावधानीपूर्वक करें।
  • चक्कर आने की समस्या हो तो इस आसन को ना करें।
  • इस आसन को करते समय ज्यादा आगे ना झुके नहीं तो पलटी खाने से सिर में चोट लग सकता है।

कागासन – Kagasana / Kaaga Yogasan in Hindi –

यह भी मध्यमवर्गीय योगासन (Yogasan in Hindi) है जिसे बैठकर किया जाता है।
इस आसन को करते समय शरीर की आकृति कौआ की तरह बनती है इसलिए इसे कागासन कहा जाता है।
कागासन का शाब्दिक अर्थ कग यानी कौआ और आसन यानी मुद्रा होता है।

कागासन करने की विधि – Kagasana Karne Ki Vidhi in Hindi –

  • सबसे पहले सावधान में खड़ा हो जाएं।
  • अब दोनों पैरों पर बैठे ध्यान रहे घुटना अगर एड़ी आपस में सटा हुआ हो।
  • दोनों हथेलियों को समानांतर घुटनों पर रखें।
  • कोहनी को जांग और पेट के बीच बने जगह स्थान में स्थापित करें।
  • कमर गर्दन और मेरुदंड को सीधा रखें।
  • साधारण स्वसन क्रिया करें एवं 15 से 20 सेकंड तक रुके।
  • अपने सुविधानुसार मूल स्थिति में वापस आ जाएं।

कागासन के लाभ – Kagasana Benefits in Hindi –

  1. पेट की समस्या से निजात मिलता है।
  2. वायु विकार दूर होता है।
  3. जांग सुडोल एवं सुंदर बनती है।

गोमुखासन – Gomukhasana / Gomukh Yogasan in Hindi –

यह भी मध्यमवर्गीय योगासन (Yogasan in Hindi) है जिसे बैठकर किया जाता है। इस आसन को करते समय जांघों की बनी आकृति गाय की मुंह की तरह होता है और दोनों पैर के पंजे गाय की कान की तरह बाहर दिखाई पड़ता है इसलिए इसे गोमुखासन कहा जाता है।

गोमुखासन करने की विधि- Gomukhasana Karne Ki Vidhi in Hindi –

  • सबसे पहले दोनों पैर को सामने फैला कर बैठ जाएं।
  • दाहिने पैर को घुटने से मोड़कर हुए पंजे को बाएं तरफ के नितंब के पास रखे।
  • बाएं पैर को घुटने से मोड़कर हुए पैर के पंजे को दाहिने तरफ की निगम के पास रखें।
  • ध्यान रहे बाएं पैर के घुटनों दाहिने पैर के घुटनों के ठीक ऊपर एक सीध में रखा हो।
  • बाएं हाथ के ऊपर उठाते हुए पीठ के पीछे ले जाएं। एवं दाहिने हाथ को नीचे से मोड़ते हुए पीठ के पीछे ले जाएं और दोनों हाथों की अंगुलियों की मदद से एक दूसरे में फंसा ले।
  • इस स्थिति में साधारण श्वसन क्रिया करें एवं अपने क्षमता अनुसार या 30 से 45 सेकंड तक रुके।
  • अब दोनों हाथों और पैरों की क्रम बदलकर इस क्रिया को दुबारा करें।

गोमुखासन के लाभ – Gomukhasana Benefits in Hindi –

  1. छाती मजबूत होता है।
  2. छाती चौड़ी होती है।
  3. शीघ्रपतन दूर होता है।
  4. मधुमेह के रोगियों को बहुत लाभ मिलता है।
  5. कब्ज दूर होता है।
  6. गठिया और बात की परेशानी दूर होता है।
  7. पीठ का दर्द दूर होता है।
  8. पैरों की एक एवं जकड़न से छुटकारा मिलता है।

मत्स्यासन – Matasyasana / Matasya Yogasan in Hindi –

यह लेट कर दिया जाने वाला मध्यमवर्गीय आसन है। इस आसन का शाब्दिक अर्थ मत सयानी मछली और आसन यानी मुद्रा होता है।
इस आसन को लगा कर घंटो पानी के ऊपर लेटा जा सकता है। इसलिए इसे मत्स्यासन कहा जाता है।

मत्स्यासन करने की विधि- Matasyasana Karne Ki Vidhi in Hindi –

  • किसी नरम चटाई पर सब ऑप्शन में पीठ के बल लेट जाएं। अब लेटे हुए अवस्था में पद्मासन लगाएं या नहीं बाय पैर को दाहिने जांघ पर रखें एवं दाहिने पैर को बाएं जांघ पर रखें।
  • अब अपने सुविधा अनुसार पीठ के भाग को ऊपर उठाएं।
  • जिससे शरीर का भार सिर एवं नितंब पर आ जाए।
  • दोनों हाथों की मदद से पैर के अंगूठे को पकड़ ले।
  • इस स्थिति में साधारण स्वसन क्रिया करें।
  • अपनी क्षमता अनुसार जितना चाहे इस आसन में रुक सकते हैं।
  • शुरुआती में 20 से 30 सेकंड तक रुके।
  • इस आसन को पद्मासन से भी किया जा सकता है पहले पद्मासन लगा ले उसके बाद लेटे।

मत्स्यासन करने के लाभ – Matasyasana Benefits in Hindi –

  1. किसी भी प्रकार की बवासीर हो उसे ठीक करता है।
  2. हृदय एवं फेफड़ा मजबूत होता है।
  3. स्वसन संबंधित सभी रोग नाश होता है।
  4. कब्ज के परेशानी को दूर करता है।
  5. भूख को बढ़ाता है।
  6. आलस्य दूर करता है।
  7. थायराइड ग्रंथि को लाभ मिलता है।
  8. सर्वाइकल में लाभ होता है।

और पढ़ें – जाने मयूरासन के 15 लाभ, करने का तरीका एवं सावधानियां

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तुलासन या उत्थित पद्मासन – Tulasana / Tula Yogasan in Hindi –

यह बैठकर किए जाने वाला मध्यमवर्गीय योगासन (Yogasan in Hindi) है। इस आसन को तुलासन, झूलासन, उत्थित पद्मासन भी कहा जाता है। इसे करते समय झूला की तरह भूल भी सकते हैं।

तुलासन करने की विधि – Tulasana Karne Ki Vidhi in Hindi –

  • किसी नरम चटाई पर पद्मासन में बैठ जाएं यानी बाएं पैर को दाहिने जांघ पर और दाहिने पैर को बाय जान पर कर के बैठे हैं। दोनों हथेलियों को जान के बगल में जमीन से टिका दें।
  • अब सांस लेते हुए दोनों हथेलियों पर दबाव देखकर ऊपर उठे।
  • इस स्थिति में शरीर का पूरा भार हथेलियों पर होगा।
  • इस अवस्था में 15 से 20 सेकंड तक रुके या अपनी क्षमता अनुसार।
  • सांस छोड़ते हुए नीचे आ जाएं।
  • इस क्रिया को दुबारा पैरों की बदली कर करें।

तुलासन के लाभ – Tulasana Benefits in Hindi –

  1. पेट की मांसपेशियां मजबूत होता है।
  2. पेट की अग्नि तेज होता है।
  3. शरीर में संतुलन आता है।
  4. कलाई, बाजू एवं कंधा मजबूत होता है।
  5. छाती मजबूत एवं पोस्ट बनता है।

सावधानियां –

  • यह आसन करते समय नाभि के निचले हिस्से पर ज्यादा जोर पड़ता है जिसके कारण कमजोर मणिबंध वाले व्यक्ति को उस उस स्थान पर खिंचाव आ सकता है।
  • इसलिए इसे शुरुआती में कम समय तक करें।

अष्टांग नमस्कार आसन – Astanga Namaskarasana / Astanga Namaskar Yogasan in Hindi –


यह लेटकर की जाने वाला मध्यम वर्गीय योगासन (Yogasan in Hindi) है। इस आसन का शाब्दिक अर्थ अष्टांग यानी 8 अंक और नमस्कार यानी प्रणाम होता है। अर्थात 8 अंगों को झुका कर प्रणाम करना।
इस आसन को करते समय आठ अंग- दोनों पैर, दोनों घुटना, दोनों हाथ, छाती एवं ठुड्डी को जमीन से स्पर्श कराकर भगवान को साष्टांग नमस्कार करने जैसा शरीर की आकृति बनती है। इसलिए इसे अष्टांग नमस्कारासन कहते हैं।

अष्टांग नमस्कार आसन करने की विधि – Astanga Namaskar Karne Ki Vidhi in Hindi –

  • किसी नरम चटाई पर पेट के बल लेट जाएं।
  • अब अपने हथेलियों को कंधे की बगल में जमीन से टिका दें।
  • कमर के हिस्से को ऊपर उठाएं।
  • अब शरीर को इस प्रकार स्थापित करें कि जमीन से केवल दोनों पैर के अंगुलियों दोनों घुटना दोनों हथेली छाती एवं ठुड्डी स्पर्श करें।
  • इस स्थिति में साधारण स्वसन क्रिया करें। अपनी क्षमता अनुसार इस स्थिति में रुके।
  • एवं ध्यान करें कि शरीर के सभी रोग नाश हो रहे हैं।

अष्टांग नमस्कार आसन के लाभ – Astanga Namaskar Benefits in Hindi –

  1. मेरुदंड से संबंधित सभी रोग दूर हो जाता है।
  2. शरीर में नई ऊर्जा एवं चेतना का संचार होता है।
  3. शरीर को पूरा आराम मिलता है एवं तरोताजा बनता है।
  4. मन को शांति एवं आराम देता है।

त्रिकोणासन – Trikonasana / Trikon Yogasan in Hindi –

यह खड़ा होकर की जाने वाला मध्यमवर्गीय योगासन (Yogasan in Hindi) है। इस आसन का शाब्दिक अर्थ त्रिकोण यानी तीन कौन होता है।

त्रिकोणासन करने की विधि- Trikonasana Karne Ki Vidhi in Hindi –

  • सबसे पहले सावधान खड़ा हो जाए।
  • अपने बाएं पैर को दो से 3 फीट की दूरी पर खोलकर खड़ा हो जाए।
  • अब अपने हाथों को बगल से फैलाते हुए कंधे की ऊंचाई तक जमीन के समानांतर उठाएं।
  • सांस छोड़ते हुए कमर के ऊपरी हिस्से को बाएं तरफ से झुकाए। एवं बाएं हाथ से बाएं पैर के टकना या पंजा को स्पर्श करें।
  • ध्यान रहे दोनों पैर सीधा हो मुन्ना नहीं चाहिए।
  • अब दाहिने हाथ को सीधा आसमान की तरफ खड़ा करें या अपने दाहिने कान से सटाकर रखें।
  • इस स्थिति में 20 से 30 सेकंड तक रुके।
  • सांस लेते हुए सीधा खड़ा हो जाए।
  • इस क्रिया को अब दाहिने तरफ से दोहराएं।

त्रिकोण आसन के लाभ – Trikonasana Benefits in Hindi –

  1. पेट संबंधित विकार दूर होता है।
  2. कब्ज को दूर करने में सहायक है।
  3. मेरुदंड एवं कमर लचीला बनता है। गर्दन विकार दूर होता है।
  4. पीठ का दर्द ठीक होता है।
  5. पैरों की मांसपेशियां को मजबूती मिलता है।

पवनमुक्तासन – Pawanmuktasana / Pawanmukt Yogasan in Hindi –

यह लेटकर की जाने वाला मध्यमवर्गीय योगासन (Yogasan in Hindi) है। इस आसन का शाब्दिक अर्थ पवन यानी वायु और मुक्त यानी निष्कासन होता है।
इस आसन को करने से वायु तत्काल निष्कासित हो जाता है इसलिए इसे पवनमुक्तासन कहा गया है।

पवनमुक्तासन करने की विधि- Pawanmuktasana Karne Ki Vidhi in Hindi –

  • किसी नरम चटाई पर पीठ के बल लेट जाएं।
  • अब दोनों हाथों की मदद से दाहिने पैर को घुटने से मोड़ते हुए छाती के पास लाए।
  • सांस को बाहर करें एवं सिर को ऊपर उठाकर नाक को घुटने से स्पर्श कराएं।
  • दोनों हाथों को लॉक कर जान से पेट को दबाए।
  • इस स्थिति में सांस रोककर रखें एवं 10 से 20 सेकंड तक रुके या अपनी क्षमता अनुसार। अब सांस लेते हुए मूल अवस्था में आ जाएं।
  • इस क्रिया को अब बाएं पैर को मोड़कर करें।
  • तथा इसी क्रिया को को फिर दोनों पैर एक साथ मोड़कर करें।

पवन मुक्तासन के लाभ – Pawanmuktasana Benefits in Hindi –

  1. इस आसन के कई लाभ हैं।
  2. इस आसन को करने से पेट की गैस तत्काल बाहर निकलता है।
  3. गठिया या कमर दर्द में लाभदायक है।
  4. कब्ज एवं अपच की समस्या दूर होता है।
  5. आलस्य को दूर करता है।
  6. मानसिक विकार एवं सिर दर्द में लाभकारी है।
  7. चर्बी कम कर मोटापा दूर भगाता है।
  8. मेरुदंड लचीला एवं मजबूत बनता है।
  9. मानसिक कमजोरी दूर होता है।
  10. भूख को बढ़ाता है।
  11. छात्रों के लिए यह आसन लाभदायक है।

सावधानीयां –

स्लिप डिस्क या साइटिका वाले मरीज इस आसन को ना करें। अति उच्च रक्तचाप के रोगी इस आसन को ना करें।

भुजंगासन – Bhujangasana / Bhujang Yogasan in Hindi –

यह पेट के बल लेटकर की जाने वाला मध्यमवर्गीय योगासन (Yogasan in Hindi) है। इस आसन का शाब्दिक अर्थ भुजंग यानी नाग (सर्प) होता है।

इस आसन को करते समय शरीर की आकृति नाग की फन की तरह बनता है इसलिए इसे भुजंगासन कहा जाता है।

भुजंगासन करने की विधि – Bhujangasana Karne Ki Vidhi in Hindi –

  • किसी नरम चटाई या योगा मैट पर पेट के बल लेट जाएं।
  • पैर को पीछे तान कर रखें एवं तलवा आसमान की तरफ रखें।
  • अब अपने हथेलियों को कंधे के बगल में जमीन से टिका दें।
  • सांस लेते हुए हथेलियों पर दबाव बनाकर सीर एवं छाती को ऊपर उठाएं उठाएं।
  • चेहरा आसमान की तरफ करने की कोशिश करें।
  • इस स्थिति में साधारण स्वसन क्रिया करें एवं 20 से 30 सेकंड तक रुके।
  • सांस छोड़ते हुए मूल अवस्था में आए।

भुजंगासन करने के लाभ – Bhujangasana Benefits in Hindi –

  1. कब्ज को दूर करता है।
  2. स्लिप डिस्क की समस्या से परेशान व्यक्ति के लिए लाभदायक है।
  3. शरीर लचीला बनता है।
  4. कमर दर्द में लाभकारी है।
  5. पेट की चर्बी को कम करता है।
  6. मेरुदंड के विकार दूर होता है।
  7. शरीर को सुडौल एवं लोचदार बनाता है।
  8. स्त्री रोग में बहुत लाभकारी माना जाता है।

सावधानियां –

  • हृदय रोगी इस आसन को ना करें।
  • गर्भवती महिला इस आसन को ना करें।
  • हर्निया के मरीज को इस आसन को नहीं करना चाहिए।
  • अल्सर के रोगी इस आसन को ना करें।
  • अति उच्च रक्तचाप के व्यक्ति इस आसन को ना करें।

धनुरासन – Dhanurasana in Hindi –

इस आसन को करते समय शरीर की आकृति धनुष के समान बनती है इसलिए इसे धनुरासन कहा जाता है। इसे लेट कर किया जाता है।

धनुरासन करने की विधि – Dhanurasana Karne Ki Vidhi in Hindi –

  • किसी नरम चटाई पर पेट के बल लेट जाएं। पैरों को घुटनों से मोड़ें एवं हाथों के हाथों से एड़ियों के पास पकड़ ले।
  • अब सिर और सीने को ऊपर उठाते हुए हाथों की मदद से पैरों को भी ऊपर खींचे एवं शरीर की आकृति धनुष के समान बनाने की कोशिश करें।
  • इस स्थिति में अपने सुविधानुसार साधारण स्वसन क्रिया करें।
  • एवं 10 से 15 सेकंड तक रुके।
  • श्वास छोड़ते हुए मूल अवस्था में वापस आए।

धनुरासन करने के लाभ- Dhanurasana Benefits in Hindi –

  1. कब्ज के लिए रामबाण माना जाता है।
  2. जट रागनी को ठीक करता है।
  3. मोटापा दूर करता है।
  4. पाचन तंत्र को ठीक कर मजबूत बनाता है।
  5. शरीर लचीला बनता है। स्त्री रोग में लाभकारी है।
  6. स्त्रियों को प्रजनन तंत्र के लिए लाभकारी माना जाता है।

सावधानियां –

हृदय विकार वाले व्यक्ति इस आसन को ना करें। उच्च रक्त वाले मरीज इस आसन को ना करें।
पलसर, हर्निया, आत, किडनी से संबंधित कोई बीमारी हो तो इस आसन को ना करें।

कंधरासन / सेतुबंधासन – Kandharasana /Setubandhasana in hindi

यह लेट कर की जाने वाला मध्यमवर्गीय योगासन (Yogasan in Hindi) है।

कंधरासन करने की विधि – Kandharasana Karne Ki Vidhi in Hindi –

  • किसी नरम चटाई पर पीठ के बल लेट जाएं पूर्णविराम अब पैर को मोड़कर एड़ियों को नितंब के पास रखें।
  • बाएं हाथ से बाएं पैर के टखना के पास पकड़े एवं दाहिने हाथ से दाहिने टखना को पकड़े।
  • सांस अंदर भर कर कमर के हिस्से को ऊपर उठाएं। पेट एवं छाती को ऊपर की ओर उभारे। इस स्थिति में 15 से 20 सेकंड तक रुके।
  • कमर को नीचे दिखाते हुए पैर को फैला कर मूल अवस्था में आ जाएं।

कंधरासन के लाभ – Kandharasana Benefits in Hindi –

  1. मेरुदंड से संबंधित रोग ठीक होता है।
  2. कुर्सी पर लगातार बैठकर कार्य करने वाले व्यक्ति इस आसन को जरूर करें पीठ एवं कमर दर्द ठीक हो जाएगा।
  3. स्वसन तंत्र को ठीक कर दमा जैसी बीमारी को नाश करता है।
  4. गले की बीमारी थायराइड आदि रोग में लाभदायक है।
  5. स्त्री रोग में लाभकारी है।
  6. गर्भपात तथा मासिक धर्म की गड़बड़ी को सुधार करता है।
  7. प्रजनन तंत्र को स्वस्थ बनाता है।

सावधानियां –

पेट में कोई जटिल बीमारी या अल्सर हो तो इस आसन को ना करें।
हर्निया वाले व्यक्ति इस आसन को ना करें।
जिस व्यक्ति को गले में कोई जटिल बीमारी हो तो इस आसन को ना करें।

और पढ़े – जाने वज्रासन के 20 फायदे, इसे करने की विधि, सावधानियां

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सर्वांगासन – Sarvanagasana / Aarvang Yogasan in Hindi –

यह आसन का शाब्दिक अर्थ सर्व यानी सभी या पूरा और अंग यानी शरीर का भाग होता है। अर्थात इस योगासन (Yogasan in Hindi) को करने से शरीर के सभी अंगो का योग क्रिया हो जाता है। और पूरे शरीर को लाभ मिलता है। इसलिए इसे सभी आसनों का राजा भी कहा जाता है।

सर्वांगासन करने की विधि – Sarvanagasana Karne Ki Vidhi in Hindi –

  • पीठ के बल किसी नरम चटाई पर लेट जाएं।
  • दोनों हाथों को जमीन पर स्थापित कर इस पर दबाव बनाते हुए पैर को ऊपर उठाएं।
  • पैर जब सिर के लगभग ऊपर आ जाए तब अपने हथेलियों को कमर के नीचे लगाकर सहारा दे।
  • अब हाथों के सहारे धीरे-धीरे कमर को ऊपर उठाएं।
  • पूरे शरीर को इतना उठाएं की छुट्टी छाती से स्पर्श करने लगे।
  • इस स्थिति में पैर के पंजे को सीधा ऊपर तान कर रखे हैं।
  • साधारण स्वसन क्रिया करें।
  • अपनी क्षमता अनुसार इस स्थिति में रुके यह कम से कम 30 से 45 सेकंड तक रुके।
  • पैर को नीचे लाते हुए मूल स्थिति में वापस आ जाएं।

सर्वांगासन के लाभ – Sarvanagasana Benefits in Hindi –

  1. इस आसन को करने से पूरे शरीर को लाभ मिलता है।
  2. थायराइड ग्रंथि एवं गले के सभी रोग नाश हो जाता है। हृदय संबंधित विकार दूर होता है।
  3. मेरुदंड संबंधित बीमारी ठीक हो जाता है।
  4. मिर्गी रोग में अत्यंत लाभकारी है।
  5. मस्तिष्क संबंधी विकार में बहुत लाभकारी है।
  6. बुद्धि भ्रमित व्यक्ति को जरूर इस आसन करना चाहिए।
  7. बालों का झड़ना रुक जाता है।
  8. चेहरा चमकने लगता है।
  9. नेत्र ज्योति बढ़ती है।
  10. रक्त विकार दूर होता है।
  11. निम्न रक्तचाप वाले व्यक्ति को लाभ मिलता है।
  12. पाचन तंत्र सुचारू हो जाता है।
  13. स्त्री रोग में लाभकारी है इसलिए महिलाएं इस आसन को जरूर करें। कहा जाता है
  14. इस आसन को करने से पुनः जवानी आ जाता है।

सावधानियां –

उच्च रक्तचाप या जटिल हृदय विकार वाले व्यक्ति इस आसन को ना करें।
स्लिप डिस्क या सर्वाइकल के मरीज इस आसन को ना करें।
पेट में कोई जटिल समस्या हो तो इस आसन को ना करें।

हलासन – Halasana / Hal Yogasan in Hindi –

हलासन का शाब्दिक अर्थ खेतों में पढ़ाई के लिए उपयोग की जाने वाली एक औजार जिसे हल कहा जाता है। इस आसन को करते समय शरीर की आकृति हल्की तरह बनता है इसलिए इसे हलासन कहा जाता है।

हलासन करने की विधि – Halasana Karne Ki Vidhi in Hindi –

  • किसी नरम चटाई पर पीठ के बल शवासन में लेट जाएं।
  • अपने हाथों को बगल में रखें एवं हथेलियां जमीन से स्पर्श कराकर रखें।
  • अपने दोनों पैरों को समानांतर उठाते हुए ऊपर से सिर के पीछे लाएं।
  • पैरों की अंगुलियां जमीन से स्पर्श कराएं।
  • ध्यान रहे पैर सीधा हो घुटनों से पैर मुड़ना नहीं चाहिए।
  • इस स्थिति में असाधारण स्वसन क्रिया करें।
  • अपनी क्षमता अनुसार या 30 से 45 सेकंड तक इस आसन में रुके।
  • यदि आप चाहें तो पैर के पंजे को अपने दोनों हाथों से पकड़ सकते हैं।

हलासन के लाभ – Halasana Benefits in Hindi –

  1. इस आसन से भी यवन प्रदान होता है।
  2. बुढ़ापे में रीड की हड्डी को झुकने से रोकता है।
  3. कब्ज दूर होता है।
  4. थायराइड संबंधित बीमारी में लाभ मिलता है।
  5. मोटापा दूर होता है।
  6. आलस्य दूर होता है।
  7. मन में प्रसंता आती है।
  8. कार्य करने की शक्ति को बढ़ाता है।
  9. रक्त संचार को सुचारू से क्रियान्वित करता है।
  10. भूख को बढ़ाता है।
  11. जठराग्नि को ठीक करता है।

सावधानियां-

उच्च रक्तचाप वाले व्यक्ति इस आसन को ना करें।
हर्निया से परेशान व्यक्ति इस आसन को ना करें।
स्लिप डिस्क या साइटिका वाले मरीज इस आसन को ना करें।

शीर्षासन – Sirsasana / Sirsh Yogasan in Hindi –

शीर्षासन का शाब्दिक अर्थ सिर के बल योगासन (Yogasan in Hindi) करना। यहां शीर्ष का मतलब सिर के आगे वाला भाग है। इस आसन में सिर के अग्रभाग पर संतुलन बना कर खड़ा होना होता है।

शीर्षासन करने की विधि – Sirsasana Karne Ki Vidhi in Hindi –

  • किसी गद्देदार कंबलिया चटाई पर वज्रासन में बैठ जाएं।
  • अब घुटनों पर सवार होकर आगे झुकते हुए शरीर को जमीन से टिका दें।
  • दोनों हाथों को आपस में फंसा कर सिर के पीछे घेरा बनाते हुए जमीन से सपोर्ट ले।
  • अब अपने कमर को ऊपर उठाएं एवं शरीर की आधा भार सिर पर दें।
  • दोनों पैरों को जमीन से उठाते हुए सिर पर बैलेंस संतुलन बनाए।
  • अब धीरे-धीरे संतुलन बनाते हुए एक पैर को ऊपर सीधा करें।
  • फिर दूसरी पैर को सीधा करें।
  • आप चाहे तो दोनों पैर एक साथ सीधा कर सकते हैं।
  • पंजे को ऊपर तान कर रखें।
  • सिर तथा हाथों पर संतुलन बनाए। साधारण स्वसन क्रिया करें।
  • अपनी क्षमता अनुसार इस स्थिति में रुके। धीरे से पैर नीचे लाते हुए मूल अवस्था में वापस आए।
  • आप चाहे तो किसी दूसरे व्यक्ति से सहायता ले सकते हैं या किसी दीवार की भी सहायता ले सकते हैं।

शीर्षासन करने के फायदे – Sirsasana Benefits in Hindi –

  1. इस आसन के कई सारे लाभ होने के कारण इसे भी आसनों का राजा कहा जाता है।
  2. मस्तिष्क संबंधी विकार दूर हो जाती है।
  3. मानसिक दुर्बलता धीरे-धीरे दूर हो जाता है।
  4. बालों को झड़ने से रोकता है।
  5. असमय उजले बाल होने से रोकता है।
  6. त्वचा संबंधित विकार दूर होता है।
  7. चेहरे पर चमक आती है।
  8. सिर में शुद्ध रक्त प्रवाह को बढ़ाता है।
  9. पूरे शरीर का रक्त शुद्ध होता है। आंखों संबंधित विकार दूर होता है।
  10. आंखों में रोशनी बढ़ती है। मिर्गी को ठीक करता है।
  11. आलस्य दूर करती लाता है।
  12. चेहरे पर पड़ने वाली झुरियां समाप्त हो जाता है।
  13. दम्मा दूर होता है।
  14. पेट संबंधित सभी लाभ मिलता है।

सावधानियां –

  • नए अभ्यर्थी शीर्षासन अकेले ना करें।
  • इसे करने के लिए किसी व्यक्ति की सहायता अवश्य लें।
  • पीछे गिरने से कमर या पीठ में जटिल समस्या या नुकसान हो सकता है।
  • यह आसन को सीखने में ज्यादा जल्दी बाजी ना करें।
  • नए अभ्यर्थी को इस आसन के अभ्यास में 10 से 15 दिन लग सकता है।
  • शुरुआती में ज्यादा देर तक न करें गर्दन या सिर में दर्द हो सकता है।
  • सिरसासन करने के बाद शवासन जरूर करें।
  • उच्च रक्तचाप के मरीज इस आसन को ना करें।
  • हृदय रोगी इस आसन को ना करें।
  • चक्कर आने की समस्या हो तो इस आसन को न करें।

जानू शीर्षासन / जनु सिरासन – Janusirsasana / Janu Sirsh Yogasan in Hindi –

इस आसन का शाब्दिक अर्थ जानू यानी घुटना और शीर्ष यानी सिर का अगला भाग है। अर्थात इस योगासन (Yogasan in Hindi) को करते समय सिर को घुटने से स्पर्स कराया जाता है।

जानू शीर्षासन करने की विधि – Janusirsasana Karne Ki Vidhi in Hindi –

  • दोनों पैर सीधा लंबवत करके बैठ जाएं।
  • अब बाएं पैर को घुटने से मोड़कर हुए एड़ी को गुप्तांग के पास रखें।
  • दोनों हाथों को आपस में हंसाते हुए दाहिने पैर के अंगूठे के पास स्पर्श कराएं।
  • अब सांस छोड़ते हुए आगे झुकी एवं हाथों को दाहिने पैर के तलवों के पार पकड़े एवं सिर को घुटने से स्पर्श कराएं।
  • इस स्थिति में साधारण स्वसन क्रिया करें एवं 30 से 45 सेकंड तक रुके।
  • सांस लेते हुए मूल अवस्था में आए।
  • अब इसी क्रिया को पैर बदलकर दोबारा करें।

जानू शीर्षासन करने का लाभ – Janusirsasana Benefits in Hindi –

  1. पेट की मांसपेशियों को ठीक करता है।
  2. किडनी को सुचारू रूप से कार्य करने के लिए उसे स्वस्थ बनाता है। चेहरे पर चमक आती है।
  3. अंडकोष की वृद्धि से परेशान व्यक्ति को इस आशंका अधिक लाभ मिलता है। इसलिए इस आसन को ज्यादा देर तक करें।
  4. पेट संबंधित रोग को नाश करता है।

सावधानियां –

गर्भवती महिला इस आसन को ना करें।
साइटिका वाले मरीज इस आसन को न करें।

अर्ध मत्स्येंद्रासन – Ardha matsyendrasana / Ardha Matsyendra Yogasan in Hindi –

इस आसन का नाम योगी मत्स्येंद्रनाथ के नाम पर रखा गया है। ऐसा माना जाता है कि यह योगासन (Yogasan in Hindi) सबसे पहले इन्होंने ही बताया था।

अर्धमत्स्येंद्रासन करने की विधि – Ardha matsyendrasana Karne Ki Vidhi in Hindi –

  • किसी नरम चटाई पर दोनों पैर सीधा फैला कर बैठ जाएं।
  • अब बाएं पैर को मोड़ते हुए एड़ी को दाहिने नितंब के बगल में रखें।
  • दाहिने पैर को मोड़ते हुए एड़िया अटकना को बाएं घुटने के बगल में बाएं तरफ रखें।
  • बाएं हाथ की मदद से दाहिने पैर के अंगूठे को पकड़े एवं अपने शरीर को दाहिने तरफ मुड़ते हुए पीछे देखने की कोशिश करें।
  • ध्यान रहे आप के बाएं हाथ की कोहनी दाहिने घुटने को बाहर की तरफ धकेल रहा हो एवं हाथों से अंगूठा ना छूटे।
  • यह भी ध्यान रखें कि अंगूठा पकड़ते समय हाथ को अपने शरीर के अंदर से ले जाएं बाहर से नहीं।
  • अब अपने दाहिने हाथ को कमर के पीछे घुमा कर रखें।
  • आप अपनी क्षमता अनुसार जितना हो सके पीछे देखने की कोशिश करें।
  • इस स्थिति में असाधारण स्वसन क्रिया करें। एवं 10 से 15 सेकंड तक इस आसन में रुके।

अर्धमत्स्येंद्रासन के लाभ – Ardha matsyendrasana Benefits in Hindi –

  1. कब्ज के मरीज के लिए यह आसन रामबाण है।
  2. पाचन तंत्र को ठीक कर स्वस्थ बनाता है।
  3. मोटापा दूर करता है।
  4. 72000 नालियों के दोष दूर करता है। मधुमेह के रोगी को लाभ मिलता है।
  5. हर्निया के रोगी को भी अधिक लाभ मिलता है। मेरुदंड मजबूत बनता है।
  6. पेट की मालिश हो जाता है।

सावधानियां –

अल्सर के मरीज इस आसन को न करें। गर्भवती महिला इस आसन को ना करें।
साइटिका से परेशान व्यक्ति इस आसन को ना करें।
स्लिप डिस्क वाले व्यक्ति इस आसन को ना करें।
मेरुदंड की जटिल समस्या वाले व्यक्ति इस आसन को ना करें।

शवासन- Savasana / Shav Yogasan in Hindi –

शवासन का शाब्दिक अर्थ सब यानी मृत शरीर होता है। इस आसन को करते समय शरीर इतना निश्चल हो जाता है जैसे कि मरा हुआ शरीर हो। इसलिए इसे शवासन कहा गया है।

सब आसन करने की विधि – Savasana Karne Ki Vidhi in Hindi –

  • किसी नरम चटाई पर पीठ के बल लेट जाएं।
  • दोनों हाथों को बगल में रखें एवं हथेलियां आसमान की तरफ रखें।
  • हथेलियों को आधा खोल कर रखे। दोनों एरिया आपस में मिला हो।
  • पंजा बाहर की तरफ हो।
  • सहजता से आंखों को बंद करें एवं साधारण शोषण किया करें।
  • अपने मन को शांत करें एवं ध्यान को अपनी आती और जाती हुई सांसों पर लगाए। मस्तिष्क को आराम दें।
  • इधर-उधर मन को भटकने से रोकने।
  • इस स्थिति में 5 से 10 मिनट तक रुके।

शवासन करने के लाभ – Savasana Benefits in Hindi –

  1. अनिद्रा से परेशान व्यक्ति को बहुत लाभ मिलता है।
  2. अनिद्रा दूर हो जाता है।
  3. तनाव से मुक्ति मिलता है। दिमाग को क्रियाशील बनाता है।
  4. एवं शक्ति मिलता है। उच्च रक्तचाप वाले मरीज को बहुत लाभ मिलता है।
  5. यह किसी भी उम्र के व्यक्ति कर सकता है। ज्यादा लाभ प्राप्त करने के लिए योग निंद्रा करें।
  6. थकावट दूर होता है।
  7. शरीर तरोताजा हो जाता है। शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है।

योगासन के लिए कुछ महत्वपूर्ण बातें-

  • योगासन सुबह के समय करना ज्यादा उचित माना जाता है।
  • हमेशा योग खाली पेट ही करना चाहिए। योगासन नित्य क्रिया करने के बाद ही करें।
  • योगासन के लिए साफ सुथरा एवं खुले हवादार स्थान को ही चुने।
  • योगासन करने के लिए किसी नरम चटाई या कंबल का उपयोग करें।
  • किसी भी योगासन को अपनी क्षमता अनुसार ही करें शुरुआती में कम समय करें ज्यादा उचित होगा।
  • अभ्यास करते करते धीरे-धीरे समय को बढ़ाएं।
  • योगासन करने के लिए किसी योग शिक्षक की सहायता या मार्गदर्शन जरूर ले।

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धन्यवाद…..

लेख स्रोत – विकिपीडिया और सम्पूर्ण योग विद्या

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