Pet Kam Karne ka Yoga

Pet Kam Karne ka Yoga : रामबाण 10 आसन पेट कम करने के

इस लेख में 10 ऐसे पेट कम करने का योगासन ( Pet Kam Karne ka Yoga ) के बारे में बताए हैं जो कोई भी, किसी भी उम्र के व्यक्ति आसानी से कर सकता है।

पेट कम करने के लिए कठिन परिश्रम करना पड़ता है , भागदौड़ करनी पड़ती है, साइड क्रंच सिटअप , पूसअप जैसी कई एक्सरसाइज करने पर पेट की चर्बी को खत्म कर सकते हैं। लेकिन यह सभी उम्र के व्यक्ति के लिए संभव नहीं है।

यदि आप ये सब किये बिना पेट की चर्बी कम करना चाहते हैं तो नीचे बताए गए 10 आसान सी (Pet Kam Karne ka Yoga) आसन लगातार करें आपको कुछ ही दिनों में पेट कम होने शुरू हो जाएंगे।

इसका खास बात यह है कि ये आसन किसी भी उम्र के व्यक्ति कर सकते हैं चाहे वह स्त्री हो या पुरुष।

इस आसन को करते हुए थोड़ी खानपान पर परहेज रखें तो आप का रिजल्ट दिखना जल्द शुरू हो जाएगा।

नीचे बताए गए आसन को अपने क्षमता अनुसार कम से कम चार से पांच सेट जरूर करें। इसकी पूर्ण जानकारी एवं लाभ प्राप्त करने के लिए इस लेख को अंत तक पढ़ें।

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पादहस्तासन से पेट को कम करें – Padahtaasn Pet Kam Karne ka Yoga hai –

इस आसन का शाब्दिक अर्थ- पाद यानी पैर और हस्त यानी हाथ होता है। इस आसन में पैर के तलवे और हथेलियों को जमीन से लगाकर खड़ा होना होता है चाहे तो आप अपने हथेलियों को पैरों के नीचे दबा कर खड़ा हो सकते हैं इस स्थिति में अपने नाक या सिर को घुटने से संपर्क करने की कोशिश करना चाहिए।

Pet Kam Karne ka Yoga

पादहस्तासन करने की विधि –

  • अपने कद के अनुसार पैरों को आपस में खोल कर खड़ा हो जाए।
  • सामने से या बगल से दोनों हाथों को ऊपर उठाएं एवं दोनों हाथों को कान के सिद्ध में ऊपर रखें।
  • अब सांस भरते हुए कमर से नीचे झुके।
  • हथेली को जमीन से स्पर्श करने की कोशिश करें।
  • यदि संपर्क नहीं होता है तो कोशिश जरूर करें।
  • नाक को दोनों घुटने के बीच में स्पर्श कराएं या कोशिश करें।
  • स्वास लेते हुए वापस पहले की स्थिति में आ जाएं।

पादहस्तासन करने के लाभ –

  1. यह आसन करने से पेट की समस्या से निजात मिलता है।
  2. पेट में गैस की समस्या से छुटकारा मिलता है। पेट फूलने की समस्या है तो जरूर करें।
  3. सिर पर वायु चढ़ा हो तो उसमें लाभदायक होता है।
  4. सिर में रक्त संचार को बढ़ाता है।
  5. आंखों की रोशनी में बढ़ोतरी होता है।
  6. सिर में बाल झड़ना रुक जाता है।
  7. पेट की चर्बी कम होती है।
  8. चेहरा चमकने लगता है।

पादहस्तासन करते समय सावधानियां –

उच्च रक्तचाप वाले व्यक्ति इस आसन को न करें।
गर्भवती महिला इस आसन को न करें।
जिसे कमर दर्द, ह्रदय रोग या चक्कर आने की समस्या हो तो इस आसन को न करें।

भुजंगासन से पेट की चर्बी दूर करे – Bhujangasan Pet Kam Karne ka Yogasan –

जैसा कि इसके नाम से प्रतीत होता है भुजंग का अर्थ सर्प या नाग होता है यानी शरीर को नाग की तरह आकृति बनाना है। जिस तरह नाग का फन ऊपर उठा रहता है उसी प्रकार शरीर को ऊपर उठाते हुए शीर को ऊपर पीछे की ओर ले जाते हुए फन की आकृति बनाएं ।

Pet Kam Karne ka Yoga

भुजंगासन करने के विधि –

  • किसी नरम चटाई पर पेट के बल लेट जाएं।
  • दोनों हाथों को कंधे के बगल में रखें।
  • हथेली को जमीन पर कंधे के बगल में सटाकर सपाट रखें।
  • दोनों पैरों को आपस में सटाकर एवं पीछे तान कर रखें।
  • ध्यान रहे दोनों तलवा आपस में सटा हो। एवं दोनों तलवा आसमान की तरफ हो।
  • अब हथेली पर दबाव बनाते हुए शरीर को ऊपर उठाएं एवं सिर को पीछे तान कर रखें और चेहरा आसमान की तरह करने की कोशिश करें।

भुजंग आसन करने के लाभ –

  1. शरीर को लचीला बनाता है।
  2. कब्ज को दूर करता है।
  3. पेट की चर्बी को कम करता है।
  4. स्लिप डिस्क की समस्या को ठीक करता है।
  5. स्त्री संबंधित रोगों के निदान में लाभकारी है।
  6. मेरुदंड से संबंधित सभी परेशानी को दूर करता है।

भुजंगासन करते समय सावधानियां –

गर्भवती महिला इस आसन को न करें।
जिस व्यक्ति को हर्निया है उससे सावधानीपूर्वक इस आसन को करना चाहिए या न करें।
अल्सर या ह्रदय रोगी बिना किसी विशेषज्ञ की सलाह एवं देखरेख में न करें।

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धनुरासन से पेट और कमर की चर्बी दूर करे – ye hai Pet aur Kamar ki Charbi Kam Karne ke Upay –

इस आसन में शरीर को धनुष की आकृति जैसी बनानी होती है। जैसा कि इस शब्द से ही पता चल जाता है कि धनुरासन यानी धनुष जैसी आसन।

Pet Kam Karne ka Yoga Dhanurasan धनुरासन

धनुरासन करने की विधि –

  • पेट के बल किसी नरम चटाई पर लेट जाएं।
  • घुटनों को मोड़ते हुए दोनों हाथों को पीछे ले जाएं।
  • एड़ियों दोनों हाथों से आपस मे पकड़े।
  • अब सीने और सिर को ऊपर उठाएं दोनों पैरों को ऊपर उठाते हुए खींचे।
  • जितना हो सके अपनी क्षमता अनुसार पैरों और सिर को नजदीक लाने की कोशिश करें।
  • इस स्थिति को बनाए रखें, चाहे तो आगे पीछे झूला की तरह भूल सकते हैं।

धनुरासन करने के लाभ –

  1. पाचन तंत्र को मजबूत करता है।
  2. किसी भी प्रकार का कब्ज हो आसानी से दूर करता है।
  3. चर्बी जलाता है तथा मोटापा का दुश्मन माना जाता है।
  4. जठराग्नि को उत्तेजित कर ठीक करता है।
  5. स्त्री रोग में लाभकारी माना जाता है।
  6. प्रजनन तंत्र के गुण को क्रियाशील बनाता है।

धनुरासन करते समय सावधानियां –

इसे करने से पूरा पेट पर असर होता है इसलिए इसे खाली पेट ही करना चाहिए।
जिस व्यक्ति को पेट में किसी प्रकार का ऑपरेशन (सर्जरी)हुआ हो तो वह इस आसन को ना करें।
उच्च रक्तचाप या हृदय विकार वाले रोगी इस आसन को न करें।
वैसे व्यक्ति जिसे किडनी, अल्सर या हर्निया जैसी कोई भी बीमारी हो तो बिना किसी विशेषज्ञ की सलाह लिए ना करें।
ज्यादा अच्छा है कि वैसे स्थिति में ना करें बीमारी बढ़ सकता है।

सेतुबंधासन से पेट काम करें – Setubandhasan pet kam karne ke yogasan –

इस आसन का शाब्दिक अर्थ सेतु यानी पुल (ब्रिज) होता है। जिस प्रकार पुल की आकृति बीच से उठा हुआ होता है, दो छोरो से बना होता है। उसी प्रकार शरीर की आकृति इस आसन में बनाया जाता है।

सेतुबंध आसन करने की विधि –

  • किसी नरम चटाई पर पीठ के बल (शवासन में)लेट जाएं।
  • गहरी सांस लें और नॉर्मल ब्रीदिंग करें।
  • अब शरीर को बीच से ऊपर उठाएं यानी कमर और सीने को ऊपर उठाएं ।
  • शुरुआती में आप हाथों की सहारा ले सकते हैं।
  • दोनों पैरों की तलवा जमीन से सटा रहेगा ।
  • अपने दोनों हाथों से दोनों एड़ियों को पकड़े या दोनों हाथों को दोनों जांघों पर रखें या प्रणाम मुद्रा में रखें या पेट के ऊपर दोनों हाथों को आपस में बांधकर रखें।
  • पूर्ण स्थिति बनाए रखें नीचे आते समय सांस को छोड़ें।

सेतुबंध आसन करने के लाभ –

  1. पाचन तंत्र को लाभ मिलता है।
  2. मेरुदंड से संबंधित बीमारी दूर होता है।
  3. गर्दन एवं ग्रीवा विकार दूर होता है
  4. ग्रीवा ग्रंथि, पीयूष ग्रंथि, शिर्ष ग्रंथि में रक्त का संचालन की बढ़ोतरी होता है।

सेतुबंध आसन करते समय सावधानियां –

इसे करते समय सिर के नीचे गद्देदार कपड़ा जरूर रखें।
हाई ब्लड प्रेशर वाले व्यक्ति इस आसन को न करें।
सिर में कोई बड़ी ऑपरेशन या घाव हो तो ना करें।

उत्तानपादासन मोटापा कम करने के रामबाण – Utanpadasan hai pet ki charbi kam karne ke liye yogasan –

इस आसन का शाब्दिक अर्थ उत्थान यानी उठा हुआ या तना हुआ और पाद यानी पैर होता है। इसका मतलब है कि पैर को ऊपर की ओर तना हुआ शरीर।
इस आसन को ध्रुव के पिता उत्तानपाद को समर्पित है।

उत्तानपादासन करने की विधि –

  • किसी नरम या मुलायम चटाई पर पीठ के बल लेट जाएं।
  • दोनों हाथों को बगल में कमर से सटाकर रखें। हथेलियां जमीन में स्पर्श करता हो।
  • अब सांस को भरते हुए पैर को ऊपर 60 डिग्री तक उठाएं।
  • ध्यान रहे दोनों पंजा आपस में मिला हो एवं आगे की ओर खींचा हुआ हो।
  • इस स्थिति में अपना क्षमता अनुसार 1 या 2 मिनट तक रुके।
  • सांस को छोड़ते हुए वापस मूल अवस्था में आएं।

उत्तानपादासन करने के लाभ –

  1. पेट की चर्बी का दुश्मन माना जाता है।
  2. यदि किसी की नाभि इधर-उधर खिसक गया हो तो उसे अपने स्थान पर लाता है।
  3. कमर, पीठ, पेट की मांसपेशियों को सुडौल बनाता है।
  4. कब से परेशान व्यक्ति इस आसन को अवश्य करें।
  5. वायु संबंधी विकार नष्ट हो जाता है

उत्तानपादासन करते समय सावधानियां –

जिस व्यक्ति को रीड में तेज दर्द या टूट-फूट हो तो वह इस आसन को न करें।
कमर में तेज दर्द है तो इस आसन को नहीं करना चाहिये।

पवनमुक्तासन पेट की समस्या को दूर करे – Pawanmuktasan hai Pet Kam Karne Ka Yoga –

इस आसन का शाब्दिक अर्थ पवन यानी वायु और मुक्त यानी निष्कासन रिलीज होता है। इस आसन को करने से शरीर से वायु का निष्कासन हो जाता है।
इस आसन को दो से तीन प्रकार से किया जा सकता है। पहले यह पैर के द्वारा फिर पैर बदलकर तथा दोनों पैरों के एक साथ मोड़कर किया जा सकता है।

पवनमुक्तासन करने की विधि-

  • किसी नरम चटाई पर शवासन की स्थिति में (पीठ के बल) लेट जाएं।
  • किसी एक पैर को घुटने से मोड़कर जांग को सीने की तरफ लाए।
  • सास को छोड़ते हुए जंघा को दोनों हाथों की मदद से सीने में चिपकाए।
  • अब सिर को ऊपर उठाकर घुटनों से नाक को स्पर्श कराने की कोशिश करें।
  • इस स्थिति में क्षमता अनुकूल 2 से 3 मिनट तक रुके।
  • सांस को लेते हुए मूल अवस्था में वापस आ जाएं।

पवनमुक्तासन करने के लाभ –

  1. पेट में बने गैस को तत्काल बाहर निकालता है।
  2. कब्ज के रोगी को संजीवनी के समान लाभकारी होता है।
  3. पेट संबंधित अपच जैसी बीमारी को ठीक करता है।
  4. मेरुदंड को मजबूत एवं लचीला बनाता है।
  5. मस्तिष्क संबंधित सभी विकार दूर हो जाता है।
  6. शरीर सुडौल एवं सुंदर , लचीलापन बनता है।
  7. अपान वायु को बाहर निकालने में कारगर है।

पवनमुक्तासन करते समय सावधानियां –

इस आसन को करते समय मेरुदंड पर विशेष जोर पड़ता है इस स्थिति में मेरुदंड पर विशेष ध्यान दें।
इस आसन को करते समय नॉर्मल श्वास क्रिया रखें।
इसे जमीन पर ना करें किसी मुलायम चटाई को जरूर इस्तेमाल करें।

नौकासन से मोटापा दूर करें – Naukasan hai Motapa Kam Karne ke Liye Yoga –

इस आसन का शाब्दिक अर्थ- नवका यानी नाव (बोट) होता है। इस आसन को करते समय शरीर को नाव के आकृति के समान बनाया जाता है। इसलिए इसे नौकासन कहते हैं

Pet Kam Karne ka Yoga Naukasan नौकासन

नौकासन करने की विधि –

  • किसी नरम चटाई पर पीठ के बल लेट जाएं।
  • दोनों हाथों को जमीन से एक या डेढ़ फीट ऊपर उठाकर समानांतर रखें।
  • सांस भरे एवं दोनों पैर एवं धड़, सिर को एक साथ धीरे-धीरे ऊपर उठाते हुए कमर से मोड़ें।
  • सिर और पैर एक समान ऊंचाई में होना चाहिए।
  • पैरों के पंजे आपस में सटे हुए एवं बाहर की ओर खींच कर रखें।
  • अपनी क्षमता अनुसार इस स्थिति में रुके।
  • सांस को छोड़ते हुए विराम की स्थिति में आएं।
  • यदि आप चाहें तो साधारण सांस ले सकते हैं
  • पूर्ण स्थिति में सांस को रोक कर रखे ज्यादा लाभकारी होगा।

नौकासन करने के लाभ –

  1. इस आसन को लगातार करने से पेट की आत मजबूत एवं स्वस्थ होता है।
  2. मेरुदंड को मजबूती मिलता है।
  3. पेट के सभी अंगों को लाभ मिलता है।
  4. अपने स्थान से हटी हुई नाभि सेट हो जाता है।
  5. पैरों को भी मजबूती मिलता है।
  6. पीठ बहुत मजबूत हो जाता है।
  7. स्त्री रोग को ठीक करने में लाभकारी माना जाता है।
  8. लटकते तोंद या पेट कम हो जाता है।

नौकासन करते समय सावधानियां

जिस व्यक्ति को पीठ में ज्यादा दर्द है वह इस आसन को न करें।
कमर या रीड की हड्डी में गंभीर चोट या दर्द हो तो इस आसन को न करें।

उष्ट्रासन पेट और कमर की चर्बी काम करता – Ustrasan Pet aur Kamar ki Charbi Kam Karne ke Upay hai –

इस आसन का शाब्दिक अर्थ उष्ट्र यानी ऊट होता है। इस आसन को करते समय सिर ऊंट की तरह उठाते हुए शरीर की आकृति ऊट से मिलता जुलता बनाया जाता है।

जिस प्रकार कठिन परिस्थिति में भी ऊट की स्वास्थ्य अच्छी बनी रहती है उसी प्रकार इस आसन को करने से शरीर के कई अंग स्वस्थ एवं मजबूत बनता है।

उष्ट्रासन करने की विधि –

  • किसी नरम चटाई पर वज्रासन (पैर पीछे करके) में बैठ जाएं।
  • सबसे पहले घुटने के ऊपर खड़ा हो जाएं।
  • पूरे शरीर को पीछे की ओर झुकाते हुए दोनों हाथों की मदद से समानांतर एड़ियों को पकड़े। (बाएं हाथ से बाएं एड़ी को एवं दाएं हाथ से दाएं एड़ी को)
  • सिर को गर्दन से पीछे की ओर झुकते हुए पीछे देखने की कोशिश करें।
  • पेट और छाती को बाहर की ओर निकाले।
  • अपने क्षमता अनुसार इस स्थिति में 20 से 30 सेकंड तक रुके । फिर मूल अवस्था मे वापस आ जाएं।

उष्ट्रासन करने के लाभ –

  1. मोटापा को कम कर शरीर को लचीला बनाता है।
  2. सांस से संबंधित बीमारी दूर होता है।
  3. मधुमेह को पूर्ण रूप से ठीक करता है।
  4. थायराइड को ठीक करता है।
  5. पीठ दर्द एवं कमर दर्द में लाभकारी माना जाता है।
  6. इसे करने से कब्ज दूर हो जाता है।
  7. स्वर एवं गला संबंधित विकार दूर हो जाता है।
  8. पेट की परेशानी में राहत देता है।
  9. आंखों की रोशनी बढ़ता है।
  10. दमा के मरीज इस आसन को जरूर करें बहुत लाभ होगा।
  11. स्त्री रोग को ठीक करता है।
  12. प्रजनन संबंधित विकार दूर हो जाते हैं।

उष्ट्रासन करते समय सावधानियां –

उच्च रक्तचाप वाले व्यक्ति किसी विशेषज्ञ की सलाह एवं देखरेख में करें।
यह आसन जिस व्यक्ति को चक्कर आता है उसे नहीं करना चाहिए।

जानू शीर्षासन पेट की परेशानी दूर करता – Janusirshasan ko pet kam karne ke yogasan mana jata hai –

इस आसन का शाब्दिक अर्थ जानू यानी जाघ और शिर्ष यानी सिर होता है।

Pet Kam Karne ka Yoga जानू शीर्षासन Janushirshasan

जानू शीर्षासन करने की विधि-

  • किसी नरम चटाई पर दोनों पैरों को सामने ( लंबवत ) करके बैठ जाएं।
  • बाएं पैर को बाएं हाथ के सहारे मोड़ते हुए एड़ी को जंगा मूल (गुप्तांग) में लगा कर रखें।
  • पैर का तलवा दाहिने जांघ से सटा हुआ होना चाहिए।
  • सांस को छोड़ते हुए आगे झुके।
  • दोनों हाथों की मदद से दाहिने पैर के अंगूठे को स्पर्श करने की कोशिश करें।
  • धीरे-धीरे दोनों हाथों को आपस में लॉक कर तलवों को पकड़ने की कोशिश करें।
  • तलवा को दोनों हाथों से पकड़ आने पर उसी स्थिति को बनाए रखें।
  • साधारण सांस लेते रहे इस स्थिति में अपनी क्षमता अनुसार 1 से 1:30 मिनट तक रुके।
  • सांस को लेते हुए वापस मूल अवस्था में आ जाएं।

जानू शीर्षासन करने के लाभ –

  1. यकृत और प्लीहा के रोग को दूर करता है।
  2. किडनी को सुचारू रूप से कार्य करने में सहायता प्रदान करता है।
  3. मस्तिष्क तक ऊर्जा को आसानी से पहुंचने में सहायता करता है।
  4. चेहरे की चमक को बढ़ाता है।
  5. जिस व्यक्ति को अंडकोष बड़ा हो गया हो तो उसे यह आसन ज्यादा देर तक करने से लाभ मिलेगा।

जानू शीर्षासन करते समय सावधानियां –

गर्भवती महिला इस आसन को न करें।
जिसे मेरुदंड में बड़ी समस्या है वह इस आसन को ना करें।
साइटिका से ग्रसित व्यक्ति को इस आसन को नहीं करना चाहिए।

और पढ़ेंड्रैगन फ्रूट (सुपर फ़ूड) के फायदे, नुकसान, उपयोग विधि

बालासन करना लाभदायक है पेट के लिए – Balasan Pet Kam Karne Ke Liye Aasan –

इस आसन का शाब्दिक अर्थ- बाल यानी बालक या बच्चा होता है यानी इस आसन को करते समय बच्चे की तरह बैठकर लेटना होता है।

Pet Kam Karne ka Yoga

बालासन करने की विधि –

  • किसी नरम चटाई पर वज्रासन (पैर पीछे मोड़ कर बैठना ) में बैठ जाएं।
  • अपने दोनों हाथों को समानांतर रखते हुए ऊपर कान के सिद्ध में खड़ा करें।
  • सांस को छोड़ते हुए आगे झुके।
  • अपने सिर को जमीन से स्पर्श करने की कोशिश करें।
  • फिर जमीन में स्पर्श होने पर इसी इसी स्थिति में साधारण सांस लें।
  • दोनों हथेली को आपस में मिलाकर आगे जमीन पर रखें।
  • इस स्थिति में अपनी क्षमता अनुसार 1 से 2 मिनट तक रुके।
  • सांस लेते हुए वापस मूल अवस्था में आएं।

बालासन करने के लाभ –

  1. मस्तिष्क विकार दूर होते हैं।
  2. सिर में रक्त संचार बढ़ता है
  3. उदर प्रदेश मजबूत होता है।
  4. बालों की झड़ने की समस्या दूर होती है।
  5. चेहरे में कांति आ जाती है।
  6. पाचन तंत्र स्वस्थ होता है।
  7. मोटापा कम होता है।

बाल आसन करते समय सावधानियां –

गर्भवती महिला इस आसन को न करें।
जिस व्यक्ति को रीड में कोई बड़ी समस्या हो उसे यह आसन नहीं करना चाहिए।

इस लेख से आपने क्या सीखा –

इस लेख में आपने पेट कम करने के योगासन ( Pet Kam Karne ka Yoga ) के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त किया जिसमे 10 ऐसे योगासन को साझा किया गया है जो किसी भी व्यक्ति आसानी से कर सेता है। इस लेख में बताए गए सभी आसनों के करने के विधि , लाभ एवं सावधानियों को बताया गया है । इसमे बताये गए आसान क्रमशः पादहस्तासन, भुजंगासन, धनुरासन, सेतुबंधासन, उत्तानपादासन, पवनमुक्तासन, नौकासन, उष्ट्रासन, जानू शीर्षासन, बालासन है।

आपको यह लेख Pet Kam Karne ka Yoga से जुड़ी जानकारी कैसा लगा नीचे कॉमेंट बॉक्स में जरूर लिखे। आपके द्वारा किया गया कॉमेंट हमे अच्छी लेख लिखने के लिए प्रेरित करता है, और साथ मे ये भी जरुर बताए यदि लेख में कोई त्रुटि हो या सुधार की जरूरत हो तो अवश्य उसके बारे में लिखे जिससे हम सुधार कर लेख को त्रुटिहीन बना सेक।

धन्यवाद…..

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